
26 जुलाई 2026 यानी आज भारत 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है. यह दिवस ‘ऑपरेशन विजय’ में भाग लेने वाले वीर सैनिकों के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और अटूट संकल्प को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है. यह दिवस कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की स्मृति को जीवंत रखता है और उस अद्वितीय वीरता और राष्ट्रभक्ति का सम्मान करता है, जिसने देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की.
विजय दिवस कारगिल के अमर शौर्य की विरासत को भी रेखांकित करता है. साथ ही, यह भारत की सैन्य तैयारियों के प्रति विश्वास को मजबूत करता है, नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा एवं बलिदान के लिए भी प्रेरित करता है.
जब साहस ने दुर्गम चोटियों को किया फतह
कारगिल युद्ध भारत के सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है. यह भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता, अद्वितीय साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है और राष्ट्रीय गौरव एवं प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बना हुआ है.
इस साल देश कृतज्ञता और सम्मान के साथ 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है. यह अवसर 1999 में कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की स्मृति को पुनर्जीवित करता है, जब भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय शौर्य और अटूट दृढ़ता का परिचय देते हुए कारगिल की बर्फ से ढकी चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया था. 26 जुलाई 1999 को लद्दाख की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं पर तिरंगा एक बार फिर गर्व के साथ लहराया, जो वीरता, सर्वोच्च बलिदान और भारत की अदम्य राष्ट्रीय भावना का अमर प्रतीक बन गया.
कारगिल संघर्ष मई 1999 में शुरू हुआ, जब घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर कारगिल क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऊंची चोटियों पर स्थित भारतीय चौकियों पर अवैध कब्जा कर लिया. उनका मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क को बाधित करना और भारत पर कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का दबाव बनाना था. लेकिन उन्होंने भारत के दृढ़ संकल्प और सशस्त्र बलों की क्षमता का गलत आकलन किया.
भारत ने इस चुनौती का सामना करते हुए ऑपरेशन विजय शुरू किया. इस अभियान में भारतीय सैनिकों ने शानदार सैन्य रणनीति, अटूट संकल्प और अदम्य साहस का परिचय दिया. दो महीने से अधिक समय तक चले भीषण संघर्ष के बाद सभी घुसपैठियों को खदेड़ दिया गया और दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक चौकी पर एक बार फिर भारतीय तिरंगा लहराया गया.
ऑपरेशन विजय की ओर बढ़ते कदम
कारगिल युद्ध 1999 की गर्मियों में लाहौर घोषणा के तुरंत बाद शुरू हुआ. जब देश का अधिकांश भाग भीषण गर्मी का सामना कर रहा था, उसी समय कारगिल की बर्फ से ढकी दुर्गम पर्वत चोटियों पर भीषण संघर्ष जारी था. पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की और सर्दियों के दौरान अस्थायी रूप से खाली की गई पर्वतीय चौकियों पर अवैध कब्जा कर लिया. इस संघर्ष ने दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में भारतीय सैनिकों के साहस, धैर्य, सहनशक्ति और सर्वोच्च बलिदान की कठिन परीक्षा ली. करगिल युद्ध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसे परमाणु हथियार संपन्न दो देशों के बीच लड़ा गया एकमात्र पारंपरिक युद्ध माना जाता है.
‘ऑपरेशन बद्र’ का हिस्सा थी घुसपैठ
यह घुसपैठ पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन बद्र’ का हिस्सा थी. इस अभियान के तहत पाकिस्तानी सैनिकों ने कश्मीरी आतंकवादियों के वेश में एलओसी पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया और भारतीय चौकियों पर अवैध कब्जा कर लिया. उनका मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क को बाधित करना, सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सैनिकों को अलग-थलग करना तथा भारत पर कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का दबाव बनाना था.
स्थानीय निवासियों ने 3 मई 1999 को सबसे पहले कारगिल सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी. इसके बाद स्थिति की पुष्टि के लिए तत्काल टोही गश्ती दल भेजे गए. जमीनी गश्त और हवाई निगरानी के माध्यम से जल्द ही घुसपैठ के वास्तविक स्वरूप और उसके दायरे का पता चल गया. घुसपैठियों ने श्रीनगरलेह नेशनल हाईवे पर निगरानी रखने वाली महत्वपूर्ण ऊंची चोटियों पर अपनी मजबूत स्थिति बना ली थी. इनमें से अनेक चौकियां 5,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित थीं, जिससे सैन्य अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया.
ऑपरेशन विजय का आगाज
भारत ने इस चुनौती का सामना संयम, दृढ़ संकल्प और अटूट साहस के साथ किया. सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एलओसी को पार नहीं किया जाएगा. अभियान का मकसद साफ था, दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक भारतीय चौकी को फिर अपने नियंत्रण में लेना. इसी टारगेट को हासिल के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया गया.
भारतीय वायु सेना 26 मई 1999 को ऑपरेशन सफेद सागर के माध्यम से इस अभियान में शामिल हुई, जबकि भारतीय नौसेना ने भी पूर्ण तत्परता के साथ अपनी तैनाती सुनिश्चित की. इस प्रकार तीनों सेनाओं ने समन्वित और प्रभावी अभियान चलाकर भारत के अटूट संकल्प का परिचय दिया.
ऑपरेशन विजय के दौरान ‘रोकना, खदेड़ना और दोबारा कब्जा न करने देना’ की रणनीति अपनाई गई. इसके लिए अतिरिक्त सैनिकों, तोपखाने, इंजीनियरिंग इकाइयों, विशेष उपकरणों और रसद संसाधनों की तीव्र गति से तैनाती की गई. भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बीच लगभग सीधी खड़ी चट्टानों पर चढ़ाई की तथा जमा देने वाली ठंड, ऑक्सीजन की कमी और अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना किया.
युद्ध की दिशा बदलने वाली लड़ाइयां
टोलोलिंग की लड़ाई इस अभियान की पहली प्रमुख सफलताओं में से एक थी. भारतीय सैनिकों ने मई 1999 के अंतिम ऊह्ड्ळ्स में इस क्षेत्र में अभियान शुरू किया. कठिन संघर्ष के बाद 13 जून 1999 को पॉइंट 4590 और टोलोलिंग पर एक बार फिर भारतीय नियंत्रण स्थापित कर लिया गया. इस विजय ने आगे के सैन्य अभियानों का रास्ता खोल किया और भारतीय सेना को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई.
टाइगर हिल की लड़ाई कारगिल युद्ध के सबसे निर्णायक अध्यायों में से एक रही. द्रास सेक्टर की सबसे महत्वपूर्ण अहम चोटियों में शामिल टाइगर हिल भारतीय सेना के प्रमुख टारगेट में से एक थी. अद्वितीय साहस और कठिन परिस्थितियों में चलाए गए अभियान के बाद 4 जुलाई 1999 को भारतीय सैनिकों ने इस चोटी पर कब्जा कर लिया. इस विजय ने युद्ध की दिशा निर्णायक रूप से भारत के पक्ष में मोड़ दी.
पॉइंट 4875, बटालिक, मुश्कोह घाटी और कक्सर क्षेत्रों में भी भीषण संघर्ष हुए. भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक सामरिक चोटी को फिर अपने नियंत्रण में लेने के लिए कठिन परिस्थितियों में एक-एक मोर्चे पर निर्णायक लड़ाई लड़ी.
लगभग तीन महीने तक चले सैन्य अभियानों के बाद भारत ने अपने सभी कब्जे वाले क्षेत्र और चौकियां फिर हासिल कर लीं. यह पूरी कार्रवाई भारत ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किए बिना पूरी की. इस संयमित, पेशेवर एवं दृढ़ सैन्य अभियान ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान दिलाया तथा उसकी सैन्य क्षमता और जिम्मेदार आचरण को स्थापित किया.
एक ऐसी जीत जिसने देश को प्रेरित किया
कारगिल युद्ध भारत के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय बन गया. 14 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को संबोधित करते हुए ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की और सशस्त्र बलों के साहस, बलिदान और समर्पण को नमन किया. इस ऐतिहासिक विजय ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा.
कारगिल की पहचान बना शौर्य
कारगिल विजय अनगिनत वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान की गाथाओं का परिणाम थी. ऑपरेशन विजय में हर सैनिक का योगदान महत्वपूर्ण था, किंतु कुछ अद्वितीय वीरता के उदाहरण इस संघर्ष के अमर अध्याय बन गए. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन विजयंत थापर और अनेक अन्य वीर सैनिक साहस, नेतृत्व और निस्वार्थ राष्ट्रसेवा के प्रतीक बनकर उभरे.
देश ने इन अद्वितीय बलिदानों और वीरता को अपने सर्वोच्च सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया. कारगिल युद्ध के दौरान प्रदर्शित असाधारण शौर्य के लिए 4 सैनिकों को परमवीर चक्र, 9 को महावीर चक्र और 55 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 1 सैनिक को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, 6 को उत्तम युद्ध सेवा पदक तथा 8 को युद्ध सेवा पदक प्रदान किए गए. वहीं 83 सैनिकों को सेना पदक और 24 वायु योद्धाओं को वायु सेना पदक से सम्मानित किया गया. ये सम्मान कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित अद्वितीय साहस, नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के अमिट प्रतीक हैं.
भारत की रक्षा यात्रा में एक अहम मोड़
कारगिल युद्ध भारत की रक्षा यात्रा में एक अहम मोड़ साबित हुआ. इसने बेहतर तालमेल, तेजी से आधुनिकीकरण और ज़्यादा आत्मनिर्भरता की जरूरत को उजागर किया. पिछले कुछ सालों में, भारत ने अपने रक्षा तंत्र को मजबूत करने और स्वदेशी क्षमता विकसित करने के लिए कई बड़े सुधार किए हैं.
कुछ प्रमुख सुधार और पहल
- सैन्य मामलों के विभाग की स्थापना: उच्च रक्षा प्रबंधन में सुधारों के तहत सैन्य मामलों के विभाग की स्थापना की गई. यह चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के अधीन कार्य करता है, जो इसके सचिव भी होते हैं.
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद: सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद की स्थापना शामिल है. सीडीएस तीनों सेनाओं के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जनरल बिपिन रावत वर्ष 2020 में भारत के पहले सीडीएस बने थे। वर्तमान में यह दायित्व जनरल अनिल चौहान निभा रहे हैं.
- रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: रक्षा उद्योग को निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी के लिए खोला गया है. रक्षा विनिर्माण में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऑटोमैटिक रूट के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई है. इसके अलावा, आधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़े मामलों में सरकारी रूट के माध्यम से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है.
- रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि: भारत का रक्षा बजट 201314 में 2.53 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 202627 में 7.85 लाख करोड़ रुपए हो गया है. इसी अवधि में पूंजीगत व्यय भी 201415 के 94,587.95 करोड़ रुपए से बढ़कर 202627 में 2.19 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.
- रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि: भारत का रक्षा उत्पादन 202526 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया, जो 201415 के 46,429 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है.
- स्वदेशी रक्षा निर्माण को गति: रक्षा मंत्रालय ने ‘सृजन डिफेंस पोर्टल’ की शुरुआत की, जो स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सेवा मुख्यालयों को उद्योगों, एमएसएमई तथा स्टार्टअप्स से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है.
- क्षेत्रीय रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा: रक्षा औद्योगिक गलियारे रक्षा विनिर्माण के प्रमुख विकास केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं. अप्रैल 2026 तक उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे में 42,057 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से 4,409 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतर चुका है. तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारे में 32,699 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 4,446 करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश हो चुका है.
- अग्निपथ योजना: अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों में युवाओं (पुरुष एवं महिलाओं) की ‘अग्निवीर’ के रूप में चार वर्ष की सेवा अवधि के लिए भर्ती के उद्देश्य से शुरू की गई है.
सेवा में आधुनिक प्लेटफॉर्म
भारत ने युद्ध क्षमता को मजबूत करने और ऑपरेशनल प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं में आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए हैं.
- अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंक
- आईएनएस विक्रांत
- राफेल लड़ाकू विमान
- अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर
- ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता
- ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल
- प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट
- संधायक श्रेणी के सर्वे पोत
- अनाला श्रेणी के उथले जल पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत
उभरती टेक्नोलॉजी और क्षमताएं
भारत भविष्य के युद्धक्षेत्रों की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए अपनी सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से सुसज्जित कर रहा है. इसके लिए एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी, आधुनिक सैन्य प्रणालियों और रणनीतिक क्षमताओं के विकास और विस्तार में निरंतर निवेश किया जा रहा है.
- मिशन शक्ति: 27 मार्च 2019 को भारत ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘मिशन शक्ति’ के तहत एंटी-सैटेलाइट (एएसएटी) मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास एंटी सेटेलाइट मिसाइल क्षमता है.
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: साल 2022 में भारत ने निगरानी, साइबर सुरक्षा, रसद प्रबंधन, स्वायत्त प्रणालियों और युद्धक्षेत्र में निर्णय-सहायता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित 75 टेक्नोलॉजी शुरू कीं.
- मिशन दिव्यास्त्र: 11 मार्च 2024 को भारत ने ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत एक ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह मिसाइल एक साथ अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम है.
- पिनाका लंबी दूरी का निर्देशित रॉकेट: 29 दिसंबर 2025 को पिनाका लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया.
- एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम: 23 अगस्त 2025 को डीआरडीओ ने एक एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया. इस प्रणाली में मिसाइल अवरोधक, कम दूरी के वायु रक्षा हथियार तथा लेजर आधारित टेक्नोलॉजी शामिल हैं.
- हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी: भारत हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए अगली पीढ़ी की उन्नत प्रणोदन तकनीक विकसित कर रहा है.
- कुशा लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल: जुलाई 2026 में डीआरडीओ ने कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया.
- लंबी दूरी की भूमि पर प्रहार करने वाली क्रूज मिसाइल: जून 2026 में डीआरडीओ ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की भूमि पर प्रहार करने वाली क्रूज़ मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया.
- नेत्र हवाई पूर्व चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली: जून 2026 में डीआरडीओ ने स्वदेशी ‘नेत्र’ हवाई पूर्व चेतावनी एवं नियंत्रण (एईडब्ल्यू एंड सी) प्रणाली को फ़ाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस प्रदान की.
सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक
पिछले दशक में सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला है. उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 2829 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकवादी लॉन्च पैडों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर उन्हें नष्ट किया. इस कार्रवाई में आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देने वाले ढांचे को भारी क्षति पहुंचाई गई. यह अभियान सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सक्रिय और दृढ़ नीति का स्पष्ट संकेत था.
इसके कुछ वर्षों बाद 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए. इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को खुफिया सूचनाओं के आधार पर बालाकोट हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया.
यह ठिकाना नागरिक आबादी से दूर स्थित था और इसका संचालन मौलाना यूसुफ अज़हर, जो जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का बहनोई है, द्वारा किया जाता था. इन दोनों निर्णायक कार्रवाइयों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध आतंकवाद और छद्म युद्ध को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा तथा आवश्यक होने पर उसके विरुद्ध प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है.
ऑपरेशन सिंदूर
मई 2025 में संचालित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की विकसित होती सैन्य नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसके निर्णायक फैसले को एक बार फिर स्पष्ट किया. यह अभियान पहलगाम में आम नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया. भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया.
इस अभियान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख आतंकी ठिकानों और कमांड सेंटरों को नष्ट कर दिया गया. इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. मारे गए आतंकवादियों में आईसी-814 विमान अपहरण और पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे प्रमुख आतंकवादी भी शामिल थे.
इसके बाद 7 और 8 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से हमलों का प्रयास किया गया, जिन्हें भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया. इस जवाबी कार्रवाई ने भारत की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता और ड्रोन-रोधी रक्षा तंत्र की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया.
करगिल की भावना का जश्न
- शौर्य विजय यात्रा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2026 को 13 दिनों तक चलने वाली ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. मोटरसाइकिल का यह अभियान नई दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल से शुरू हुआ. 1,900 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यह यात्रा द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल पर खत्म होगी. इस अभियान में 28 राइडर्स हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें सेना के मौजूदा और रिटायर्ड जवान व उनके परिवार शामिल हैं. इस अभियान का ध्येय वाक्य है – “एक राइड, एक देश, एक सलाम.
- देशव्यापी व्हील्स ऑफ वेलोर: संचार शक्ति अभियान के तहत भारतीय सेना की सिग्नल कोर की प्रसिद्ध डेयर डेविल्स मोटरसाइकिल प्रदर्शन टीम ने 1 जुलाई 2026 को एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया. इस अभियान के दौरान 10 मोटरसाइकिल सवारों ने दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर अटल सुरंग के भीतर साहसिक करतबों का प्रदर्शन किया. उन्होंने 9.8 किलोमीटर लंबी सुरंग की दूरी मात्र 9 मिनट 47.97 सेकंड में पूरी की.
- टाइगर हिल अभियान 2026: भारतीय सेना और द्रास के नागरिक प्रशासन ने 17 जुलाई 2026 को टाइगर हिल अभियान का आयोजन किया. इस पहल का मकसद कारगिल युद्ध की गौरवशाली विरासत को संरक्षित करते हुए सैन्य पर्यटन को बढ़ावा देना था. इस अभियान में 11 प्रशिक्षित स्थानीय ट्रेकिंग गाइडों ने भी भाग लिया, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए.
- पूर्व सैनिकों और वीर योद्धाओं का सम्मान: तीनों सेनाओं के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों ने 16 जुलाई 2026 को कारगिल युद्ध स्मारक और हेरिटेज हट म्यूजियम का दौरा किया. इस दौरे से कारगिल के वीर योद्धाओं को सम्मान दिया गया और पूर्व सैनिकों, सेवारत जवानों और उनके परिवारों के बीच के मजबूत रिश्ते को और पक्का किया गया. 10 जुलाई 2026 को पूर्व सैनिकों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने भी खालुबार युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस समारोह ने देशभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा के स्थायी मूल्यों को फिर से दोहराया.
- स्मृति ट्रेक और सैन्य प्रदर्शनी: 13 जुलाई 2026 को भारतीय सेना के 137 सैनिकों ने पॉइंट 5140 (जिसे ‘गन हिल’ के नाम से भी जाना जाता है) तक एक स्मृति ट्रेक किया. यह ट्रेक ऑपरेशन विजय के दौरान तोपखाना रेजिमेंट के महत्वपूर्ण योगदान और वीरता को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था. इसके अलावा, भारतीय सेना ने हानले में हथियार एवं सैन्य उपकरण प्रदर्शनी का आयोजन किया. इस प्रदर्शनी में आधुनिक हथियारों, ड्रोन तथा निगरानी प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया.
- लेह से द्रास तक मोटरसाइकिल अभियान: भारतीय सेना के राइडर्स ने 12 और 13 जुलाई 2026 को लेह से द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक तक एक मोटरसाइकिल अभियान चलाया. राइडर्स ने मुश्किल रास्तों – फोटू ला, नामिका ला और उम्बा ला – को पार किया. ये यादगार कार्यक्रम यह सुनिश्चित करते हैं कि कारगिल की विरासत साहस, बलिदान और देश सेवा के शाश्वत आदर्शों के साथ हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहे.
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