
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की अपनी सफल यात्रा के बाद अब स्वदेश लौट चुके हैं. विदेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी अपने साथ खास मेहमानों के लिए कई नायाब तोहफे भी लेकर गए थे. पीएम ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी के अलावा मूंगा सिल्क (Muga silk) और शिरुई लिली सिल्क (Shirui Lily Silk) वाला रेशमी स्टोल उपहार में दिया तो वहां के राष्ट्रपति को पंडित भीमसेन जोशी और सुब्बुलक्ष्मी की गायन की CD भेंट की. UAE के राष्ट्रपति को केसर आम और अनानास तोहफे में दिए. जबकि नीदरलैंड की महारानी झुमके तो UAE के क्राउन प्रिंस को ‘मिथिला मखाना’ भेंट किए गए.
मुलाकात के दौरान पीएम मोदी की ओर से इटैलियन पीएम मेलोनी को गिफ्ट किए गए मेलोडी टॉफी भले ही दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया हो. लेकिन इसके इतर मेलोनी को कई शानदार उपहार दिए गए. पीएम मोदी ने उन्हें शिरुई लिली वाला रेशमी स्टोल उपहार में दिया. इस स्टोल की प्रेरणा मणिपुर में शिरुई काशोंग चोटी की धुंध भरी ऊंचाइयों से ली गई है. यह दुर्लभ शिरुई लिली से प्रेरित है जो एक नाजुक, घंटी के आकार का फूल जिसकी पंखुड़ियां हल्के गुलाबी-सफेद रंग की होती हैं और जो दुनिया में कहीं और नहीं खिलता.
पीएम मोदी ने अपनी विदेश यात्रा 15 मई को शुरू की, और इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से यात्रा की शुरुआत की. फिर वह नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली गए. इस दौरान पीएम मोदी को स्वीडन के प्रतिष्ठित सर्वोच्च सम्मान रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस और नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया.
राष्ट्रपति मैटरेला को शास्त्रीय गायन की CD
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को शिरुई लिली के अलावा मूगा रेशम का स्टोल भी उपहार में दिया गया. मूगा रेशम, जिसे असम का “सुनहरा रेशम” (Golden Silk) कहा जाता है, ब्रह्मपुत्र घाटी का एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित वस्त्र है.
अपने प्राकृतिक सुनहरे रंग और सादगी भरी सुंदरता के लिए मशहूर, यह बेहतरीन रेशम बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है, जो एक गहरी और टिकाऊ परंपरा को दर्शाता है. मूगा रेशम अपनी जबरदस्त मजबूती और लंबे समय तक टिकने की क्षमता के लिए सराहा जाता है. यह अक्सर कई पीढ़ियों तक चलता है.
गिफ्ट में खास ‘मार्बल इनले वर्क बॉक्स’ भी
विदेश दौरे के अंतिम पड़ाव के तहत पीएम मोदी इटली पहुंचे. यहां पर उन्होंने इटली के राष्ट्रपति, सर्जियो मैटरेला को पंडित भीमसेन जोशी और एमएस सुब्बुलक्ष्मी के गायन की CD के साथ-साथ ‘मार्बल इनले वर्क बॉक्स’ (संगमरमर पर नक्काशी किया हुआ बक्सा) भी भेंट किया. यह ‘मार्बल इनले बॉक्स’ देश की हस्तशिल्प कला का एक बेहतरीन नमूना है, जिसका आगरा के कुशल कारीगरों से गहरा जुड़ाव है.
चमकीले सफेद संगमरमर से बना यह बक्सा, लैपिस लाजुली, फिरोज़ा, मैलाकाइट, मूंगा और मदर-ऑफ-पर्ल जैसे कीमती पत्थरों से की गई बारीक नक्काशी से सजा है. इस बक्से के अंदर भारतीय शास्त्रीय संगीत के 2 महान दिग्गजों के अनमोल संगीत संग्रह रखा गया. पंडित भीमसेन जोशी (महान हिंदुस्तानी गायक और भारत रत्न विजेता) और सुब्बुलक्ष्मी (महान कर्नाटक गायिका और भारत रत्न पाने वाली पहली संगीतकार).
फिनलैंड के पीएम को नाथद्वारा की खास पेंटिंग
पीएम मोदी ने अपने विदेश दौरे के दौरान फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो को ‘कमल तलाई पिछवाई’ पेंटिंग उपहार में दी. यह पेंटिंग राजस्थान की नाथद्वारा परंपरा की शांत सुंदरता और भक्तिपूर्ण कला को दर्शाती है. कमल के फूलों से भरे जल के दृश्य पर केंद्रित यह रचना पवित्रता, सद्भाव और आध्यात्मिक चिंतन का प्रतीक है. यह पेंटिंग 2 ऐसी परंपराओं के बीच एक ब्रिज का काम करती है, जो जल, शांति और प्रकृति के साथ सद्भाव में अपना अर्थ और प्रेरणा पाती हैं.
मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन (Mette Frederiksen) को ‘बिदरी सिल्वर वर्क’ वाला एक गुलदस्ता उपहार में दिया. यह गुलदस्ता दक्कन की परिष्कृत कला को दर्शाता है, जो अपनी बारीक चांदी की नक्काशी, सुंदर आकार और बेहतरीन कारीगरी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यह फूलों और ज्यामितीय आकृतियों के नाजुक नमूनों से सजा उस परंपरा का प्रतीक है, जिसे हैदराबाद और दक्कन के पठार के कारीगरों ने पीढ़ियों से निखारा है.
स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस को भेंट की किताब
स्वीडन पहुंचने पर पीएम मोदी ने वहां की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को अपनी पुस्तक ‘कन्वीनिएंट एक्शन: कंटिन्यूटी फॉर चेंज’ की एक कॉपी गिफ्ट में दी. यह पुस्तक उनके भाषणों, विचारों और नीतिगत दृष्टिकोणों का एक संग्रह है, जो शासन, विकास और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति लेखक के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है. इस किताब का एक मुख्य विचार “बदलाव के लिए निरंतरता” की अवधारणा है, जो यह बताती है कि टिकाऊ प्रगति के लिए मौजूदा नींव पर आगे बढ़ना कितना जरूरी है.
पीएम मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडॉटिर को, साल 1953 में माउंट एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई के दौरान तेनजिंग नोर्गे द्वारा इस्तेमाल की गई आइस एक्स (ice axe) की एक प्रतिकृति भेंट की.
क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को गोंड पेंटिंग गिफ्ट
स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को पीएम मोदी ने एक गोंड पेंटिंग भेंट भी की. यह गोंड पेंटिंग आदिवासी कला का एक जीवंत रूप है, जिसे गोंडी समाज के लोग बनाते हैं. ये लोग मध्य प्रदेश के सबसे बड़े मूल निवासी समुदायों में से एक हैं. यह परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि “एक अच्छी तस्वीर देखने से सौभाग्य आता है.”
इसकी शुरुआत त्योहारों और समारोहों के दौरान दीवारों और फर्श पर बनाई जाने वाली एक रस्मी कला के रूप में हुई थी. गोंड कलाकार अपनी पेंटिंग्स में जानवरों, जंगलों और परिदृश्यों को चित्रित करने के लिए बारीक रेखाओं, बिंदुओं और चमकीले, विपरीत रंगों का उपयोग करते हैं, जिनमें जीवन और गति की धड़कन महसूस होती है.
स्वीडन के पीएम को लद्दाख का पश्मीना शॉल
मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन को लद्दाख की शुद्ध ऊन से बनी एक स्टोल भेंट किया. लद्दाख की शुद्ध ऊन का स्टोल, जिसे पश्मीना शॉल के नाम से भी जाना जाता है, हिमालय की आत्मा है जिसे कपड़े में बुना गया है. 5 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सुदूर चांगथांग पठार से उत्पन्न, इसे चांगथांगी बकरी की कोमल निचली ऊन से तैयार किया जाता है. यह बकरी स्वाभाविक रूप से इस क्षेत्र की अत्यधिक ठंड में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होती है. इस ऊन को स्थानीय महिलाओं द्वारा हाथ से काता जाता है और कारीगरों द्वारा पारंपरिक करघों पर बुना जाता है.
क्रिस्टरसन को इसके अलावा लोकतक चाय भी गिफ्ट की गई. लोकतक चाय एक पारंपरिक, छोटे बैच की चाय है जो लोकतक झील के आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों से आती है, जो उत्तर-पूर्व भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील भी है. मणिपुर के अनोखे इकोसिस्टम में उगाई जाने वाली यह चाय, जो अपनी तैरती “फुमदी” और भरपूर बायो-डायवर्सिटी के लिए मशहूर है. इसे केमिकल-फ्री बागानों में उगाई जाती है जो पारंपरिक खेती के तरीकों को बनाए रखते हैं. झील के किनारे का धुंध से ढका माहौल चाय को उसकी खास पहचान और शुद्धता देता है.
क्रिस्टरसन को टैगोर से जुड़ी कलाकृतियां
मोदी की ओर से क्रिस्टरसन को रवींद्रनाथ टैगोर की कुछ कलाकृतियां भी गिफ्ट की गईं. टैगोर 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली साहित्यिक और दार्शनिक लोगों में से एक थे. साल 1913 में, वे गीतांजलि के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने. बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से जुड़े टैगोर के लेखन ने भूगोल और भाषा को पार कर लिया. अपनी रचना में उन्होंने आजादी, दया, प्रकृति और साझा मानवीय भावना जैसे विषयों पर बात की. नोबेल परंपरा और नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद अपनी यात्राओं के जरिए टैगोर का स्वीडन के साथ एक खास बौद्धिक नाता बना रहा.
क्रिस्टरसन को हाथ से बना शांति निकेतन मैसेंजर बैग गिफ्ट किया. यह हाथ से बना बैग शांति निकेतन से आया है, जिसे शांति का घर कहा जाता है. यह वह जगह है जहां गुरुदेव ने सोच के ग्लोबल मेल-मिलाप की कल्पना की थी. चमड़े का काम जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) प्रोटेक्टेड क्राफ्ट है जो बीरभूम जिले के सैकड़ों कारीगरों को लगातार रोजी-रोटी देता है. यह टैगोर की कलात्मक सोच और आज के ट्रेंड्स के बीच एक ब्रिज का काम करता है.
नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को कलमकारी पेंटिंग
नॉर्वे के दौरे के दौरान मोदी मोदी ने क्राउन प्रिंस हाकोन को सूरज और चांद के डिजाइन वाली एक कलमकारी पेंटिंग गिफ्ट की. कलमकारी एक पुरानी भारतीय कला है जो हाथ से पेंट किए गए या ब्लॉक-प्रिंटेड कॉटन कपड़ों के लिए जानी जाती है, जिन्हें प्राकृतिक रंगों और कहानी कहने वाले मुश्किल डिजाइन का इस्तेमाल करके बनाया जाता है.
आंध्र प्रदेश में शुरू हुई यह कला दो अलग-अलग तरीकों में फैली. श्रीकालहस्ती, जिसे बांस की कलम से हाथ से बनाई गई ड्राइंग से पहचाना जाता है, और मछलीपट्टनम, जिसे हाथ से नक्काशी की गई लकड़ी की ब्लॉक प्रिंटिंग के लिए जाना जाता है. कलमकारी सूरज और चांद की पेंटिंग कॉस्मिक बैलेंस और अस्तित्व के दोहरेपन को दिखाती है.
नॉर्वे की रानी के लिए बेहद खास गिफ्ट
प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की रानी सोनिया को पाम लीफ पट्टचित्र भी गिफ्ट किया. यह पट्टचित्र, जिसे लोकल लोग ताला पट्टचित्र के नाम से जानते हैं, ओडिशा की सबसे पुरानी और मुश्किल कलाओं में से एक है. कपड़े से बनी पेंटिंग के उलट, इस परंपरा में ताड़ के पेड़ से लिए गए ताड़ के पत्तों पर ध्यान से बनाई गई डिटेल्ड पेंटिंग को उकेरा जाता है. अपनी बहुत ज्यादा बारीकी के लिए मशहूर, यह आर्टवर्क अक्सर धागे से जुड़ी फोल्डेबल पैनल या पट्टियों के रूप में बनाया जाता है, जिसमें कहानी कहने, कैलिग्राफी और क्लासिकल आइकनोग्राफी को एक ही कलात्मक रूप में मिलाया जाता है.
पीएम मोदी ने नॉर्वे के राजा हेराल्ड V को चांदी की एक बारीक कारीगरी वाली नाव का मॉडल उपहार में दिया. चांदी की यह खूबसूरत नाव ‘तारकशी’ कला का एक बेहतरीन नमूना है. यह चांदी की बारीक कारीगरी की एक प्राचीन कला है, जो ओडिशा के कटक शहर से जुड़ी है. कटक को अक्सर भारत का “सिल्वर सिटी” कहा जाता है. यह नाजुक कला, जो 500 से भी ज़्यादा सालों से फल-फूल रही है और इसमें चांदी के बाल जैसे पतले तारों को बड़ी बारीकी से मोड़कर और जोड़कर फीते जैसे जटिल डिजाइन बनाए जाते हैं.इस उपहार का एक निजी महत्व भी है. राजा हेराल्ड V के नौकायन के प्रति आजीवन जुड़ाव और ओलंपिक खेलों में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व करने की उनकी भूमिका को दर्शाता है.
गिफ्ट में नॉर्वे के पीएम स्टोर नायाब पेपरवेट
नॉर्वे के राजा के अलावा पीएम मोदी अपने समकक्ष पीएम जोनास गहर स्टोर को भी नायाब गिफ्ट दिया. स्टोर को सूखे हुए ऑर्किड फूलों की एक पेंटिंग और ऑर्किड के डिजाइन वाले पेपरवेट उपहार में दिए. ये खूबसूरत कलाकृतियां सिक्किम की कोहरे से ढकी घाटियों में पाए जाने वाले असली सूखे ऑर्किड और फर्न (पत्तियों) से बनाई गई हैं. इसमें हर फूल और पत्ती को स्थानीय कारीगरों ने बड़ी सावधानी से हाथ से चुना और संरक्षित किया है, जो सिक्किम के हिमालयी परिदृश्य की सदाबहार सुंदरता को अपने में समेटे हुए हैं.
संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने UAE की महारानी मां (Queen Mother) को महेश्वरी रेशमी कपड़ा उपहार में दिया. महेश्वरी रेशम खूबसूरत देश की हथकरघा परंपराओं में से एक का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर बसे ऐतिहासिक शहर महेश्वर में हुई थी. रेशम और कपास के बेहतरीन मेल के लिए मशहूर यह कपड़ा, अपनी हल्की बनावट, हल्की चमक और सदाबहार खूबसूरती के लिए बहुत पसंद किया जाता है.
परंपरागत रूप से रेशमी ताने और महीन सूती बाने से बुना गया, माहेश्वरी रेशम, रेशम की समृद्धि और कपास के आराम का एक सुंदर मेल है. यह विशेष रूप से अपने ‘रिवर्सिबल बॉर्डर’ या ‘बुगड़ी’ के लिए जाना जाता है, जो कपड़े को दोनों तरफ से खूबसूरती से पहनने की सुविधा देता है.
इसके अलावा UAE की राजमाता को करीमनगर का एक बेहद बारीक नक्काशी वाला चांदी का संदूक भेंट किया गया. यह चांदी का संदूक भारत की प्रसिद्ध ‘नक्काशी धातु-शिल्प’ परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. अपनी ‘रेपुसे’ (repoussé) तकनीक के लिए मशहूर इस शिल्प में, चांदी की चादरों पर हाथों से हथौड़ी की मदद से बेहद बारीक और जटिल आकृतियां उकेरी जाती हैं, जिससे उनमें अद्भुत गहराई, बनावट और बारीकियां उभरकर आती हैं.
UAE के क्राउन प्रिंस के लिए ‘मखाना’ और आम
पीएम मोदी ने अपने विदेश दौरे के पहले चरण में UAE के क्राउन प्रिंस को ‘मिथिला मखाना’ भेंट किया. ‘मिथिला मखाना’—जिसे ‘फॉक्स नट’ या ‘कमल के बीज’ के नाम से भी जाना जाता है. यह बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक विशिष्ट कृषि उत्पाद भी है. इसे इसकी अद्वितीय उत्पत्ति और गुणवत्ता के लिए GI टैग से भी सम्मानित किया गया है. ताजे पानी के जलाशयों से प्राप्त होने वाले ये हल्के और कुरकुरे बीज अपनी शुद्धता, पोषक तत्वों की प्रचुरता और बहुमुखी उपयोगिता के लिए जाने जाते हैं.
नीदरलैंड के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने महारानी मैक्सिमा को ‘मीनाकारी’ और ‘कुंदन’ शैली के झुमके भेंट किए. ये झुमके भारतीय आभूषण-शिल्प की बेहतरीन परंपराओं का जीवंत उदाहरण हैं, जिनकी उत्पत्ति राजस्थान के शाही राजघरानों की कार्यशालाओं में हुई थी. ये 2 ऐतिहासिक कला-शैलियों का अद्भुत संगम हैं. ‘मीनाकारी’—जिसमें धातु पर चमकीले रंगों की बेहद बारीक और नक्काशीदार मीनाकारी की जाती है और ‘कुंदन’, जिसमें शुद्ध सोने की महीन पन्नी के बीच बिना तराशे हुए कीमती रत्न जड़े जाते हैं.
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन को पीएम मोदी की ओर से मछली के चित्र वाली एक मधुबनी पेंटिंग उपहार में दी गई. मधुबनी पेंटिंग भारत और नेपाल के मिथिला क्षेत्र की GI-टैग वाली लोक कला परंपरा है, जो अपने बारीक ज्यामितीय पैटर्न और चमकीले रंगों के लिए मशहूर है. पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा की जाने वाली इस कला का इस्तेमाल लंबे समय से त्योहारों, शादियों और पवित्र अनुष्ठानों को चिह्नित करने के लिए किया जाता रहा है. इस कलाकृति में मछली का चित्र है, जो मधुबनी कला के सबसे पवित्र और स्थायी प्रतीकों में से एक है.
पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान को ‘जीवन वृक्ष’ (Tree of Life) के चित्र वाली एक रोगन पेंटिंग उपहार में दी. यह पेंटिंग गुजरात के कच्छ क्षेत्र की एक दुर्लभ और बेहतरीन कपड़ा कला शैली है, जो अपनी बारीक कारीगरी और जीवंत सौंदर्य परंपरा के लिए जानी जाती है. रोगन कला में ‘जीवन वृक्ष’ का चित्र आपस में जुड़ाव, शक्ति, नवीनीकरण और निरंतरता का एक प्राचीन प्रतीक है. जिसकी जड़ें धरती में गहरी जमी हैं और शाखाएं आसमान की ओर फैली होती हैं.
राष्ट्रपति नाहयान को केसर आम उपहार में दिए गए. यह आम, जो GI-टैग वाली किस्म है और जिसे गुजरात का “आमों की रानी” भी कहा जाता है, इसकी उत्पत्ति गुजरात के जूनागढ़ में हुई थी. अपने केसरिया रंग के, बिना रेशे वाले गूदे और तेज खुशबू के लिए मशहूर, इसे “आम्रस” दावतों के माध्यम से मनाया जाता है. आम के अलावा राष्ट्रपति नाहयान को GI-टैग वाले मेघालय के अनानास भी उपहार में दिए गए.
ये अनानास दुनिया के सबसे बेहतरीन अनानास में से एक माने जाते हैं, जो मेघालय के साफ-सुथरे, पहाड़ी इलाकों में खूब फलते-फूलते हैं. ये अपने ज़्यादा मीठेपन और कम खटास के लिए मशहूर हैं, और इनका स्वाद बहुत मीठा और खुशबूदार होता है. स्वाद के अलावा, ये अनानास पोषक तत्वों का खजाना हैं; इनमें ब्रोमेलैन (एक एंजाइम जो पाचन में मदद करता है और सूजन कम करता है) की अच्छी मात्रा होती है, साथ ही ये विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान को GI-टैग वाले मेघालय के अनानास तोहफ़े में दिए. ये अनानास दुनिया के सबसे बेहतरीन अनानास में से एक माने जाते हैं, जो मेघालय के साफ-सुथरे, पहाड़ी इलाकों में खूब फलते-फूलते हैं. ये अपने ज्यादा मीठेपन और कम खटास के लिए मशहूर हैं, और इनका स्वाद बहुत मीठा और खुशबूदार होता है. स्वाद के अलावा, ये अनानास पोषक तत्वों का खजाना हैं. इनमें ब्रोमेलैन की अच्छी मात्रा होती है, जबकि ये विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होते हैं.
नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर को पीएम मोदी ने ‘ब्लू पॉटरी यानी नीली मिट्टी के बर्तन तोहफे में दिए. जयपुर की ‘ब्लू पॉटरी’ GI-टैग वाली मशहूर कला है. यह अपने चमकीले कोबाल्ट-नीले, सफेद और पीले डिजाइनों के लिए जानी जाती है. इसे क्वार्ट्ज़ पाउडर, पिसे हुए कांच और मुल्तानी मिट्टी के एक अनोखे मिश्रण से बनाया जाता है, जिससे इसे कांच जैसी चमकदार और आकर्षक बनावट मिलती है. मिट्टी के बिना बनी इस चीज को इसकी खास पारदर्शिता और शानदार कोबाल्ट-नीले रंग देने के लिए खास तरह से पकाने की तकनीकों की जरूरत होती है.
FAO के महानिदेशक को खुशबूदार अनाजों का गिफ्ट
पीएम मोदी ने FAO के महानिदेशक, क्यू डोंग्यू को देश के कई बेहतरीन अनाजों के सैंपल भेंट किए. लाल चावल जो केरल की पालक्काड की काली मिट्टी में उगाया जाता है और इसे ‘मट्टा’ या ‘पालक्काडन मट्टा’ के नाम से भी जाना जाता है. इसका रंग गहरा लाल-भूरा होता है और इसके दाने मोटे तथा भरे-भरे होते हैं. फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन B6 से भरपूर यह अनाज GI-सुरक्षित उत्पाद है.
गोबिंदभोग चावल जो पश्चिम बंगाल का एक बेहतरीन खुशबूदार, छोटे दानों वाला चावल, जिसे अक्सर “बंगाल का चावल का कटोरा” भी कहा जाता है. पकाने पर इसकी मक्खन जैसी मीठी खुशबू और चिपचिपी बनावट के लिए इसे जाना जाता है. यह ‘पायेश’ और ‘खिचड़ी’ जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए एकदम सही माना जाता है.
बासमती चावल जो “खुशबू की रानी” के नाम से मशहूर है, और गंगा के मैदानों में उगने वाला यह बेहतरीन लंबे दानों वाला चावल, पकने पर अपनी लंबाई से लगभग दोगुना हो जाता है. इसकी खास सौंधी खुशबू के लिए इसे कुछ समय तक रखा (पुराना होने तक) जाता है. यह ग्लूटेन-मुक्त होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम होता है.
जोहा चावल (असम): ब्रह्मपुत्र घाटी में ही विशेष रूप से पाई जाने वाली एक बेहतरीन देसी खुशबूदार किस्म. सर्दियों की फसल चावल में वाष्पशील तेलों के कारण एक बहुत ही मीठी और तेज खुशबू होती है, और यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. काला नामक चावल (उत्तर प्रदेश): “बुद्ध चावल” के नाम से मशहूर, तराई क्षेत्र में उगने वाली यह प्राचीन खुशबूदार किस्म अपने अनोखे काले छिलके के लिए जानी जाती है. यह आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है.
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